NCRB रिपोर्ट ने खोली डरावनी तस्वीर, राजस्थान में हजारों बच्चे गायब
जयपुर: राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) द्वारा वर्ष 2024 के लिए जारी ताजा आंकड़ों ने राजस्थान में बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों के लापता होने के मामले में राजस्थान पूरे देश में चौथे पायदान पर है। राज्य में बीते वर्ष कुल 7,198 बच्चे लापता हुए, जिनमें से चौंकाने वाली बात यह है कि 84 प्रतिशत से अधिक संख्या नाबालिग लड़कियों की है।
लापता बच्चों की संख्या में भारी उछाल, बरामदगी अब भी चुनौती
NCRB की रिपोर्ट दर्शाती है कि राजस्थान में बच्चों की तलाश प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। लापता हुए कुल बच्चों में से 1,226 का अब तक कोई पता नहीं चल सका है, जिनमें 882 लड़कियां शामिल हैं। इतना ही नहीं, लगभग 1,399 बच्चे ऐसे हैं जो एक साल से अधिक समय से गायब हैं और उनका सुराग लगाने में पुलिस अब तक नाकाम रही है। वयस्कों के मामले में भी स्थिति चिंताजनक है, जहाँ वर्ष 2024 में करीब 39,384 लोग लापता हुए, जिनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है।
मानव तस्करी: जबरन मजदूरी और शोषण का काला खेल
मानव तस्करी के मोर्चे पर राहत की बात यह है कि मामलों की संख्या में पिछले वर्षों (2022 और 2023) की तुलना में कुछ कमी आई है, लेकिन शोषण का स्वरूप डरावना बना हुआ है। साल 2024 में दर्ज 75 मामलों में से 333 पीड़ितों को रेस्क्यू किया गया। जांच में सामने आया कि इनमें से 273 लोगों को बंधुआ मजदूरी के दलदल में धकेला गया था, जबकि 38 लोग देह व्यापार और 5 लोग जबरन विवाह जैसे अपराधों का शिकार बने। पुलिस ने इन मामलों में 154 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है।
नाबालिगों के अपहरण के मामलों में भी राज्य चौथे स्थान पर
अपहरण की घटनाओं में भी राजस्थान देश के शीर्ष चार राज्यों में शामिल है। राज्य में कुल 9,083 अपहरण के केस दर्ज किए गए, जिनमें 60 प्रतिशत से अधिक शिकार नाबालिग बच्चे थे। आयु वर्ग के विश्लेषण से पता चलता है कि 16 से 18 वर्ष की आयु के किशोर सबसे अधिक निशाने पर रहे। इसके अलावा, समाज के वंचित वर्गों जैसे दलित और आदिवासी समुदाय के बच्चों और वयस्कों के अपहरण की घटनाएं भी बड़ी संख्या में दर्ज की गई हैं, जो सामाजिक सुरक्षा के ढांचे पर चिंता व्यक्त करती हैं।
एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट की सक्रियता और विशेष निगरानी
इन बढ़ते अपराधों को देखते हुए पुलिस मुख्यालय ने अपनी रणनीति को और सख्त कर दिया है। वर्तमान में राजस्थान के 51 पुलिस जिलों में 43 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट्स सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। पुलिस प्रशासन विशेष रूप से पूर्वी और दक्षिणी राजस्थान के उन संवेदनशील इलाकों पर पैनी नजर रख रहा है, जहाँ से बच्चों के गायब होने और बाल मजदूरी की खबरें अधिक आती हैं। साथ ही, बाल विवाह और नाबालिगों की खरीद-फरोख्त जैसी कुरीतियों को जड़ से मिटाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।