हाजीपुर। बिहार के हाजीपुर-मुजफ्फरपुर रेलखंड पर स्थित सराय स्टेशन के पास एक सुरक्षा चूक का बेहद गंभीर और हैरान करने वाला मामला प्रकाश में आया है। यहाँ एक समपार फाटक के निकट सिग्नल टावर पर अवैध रूप से लगाए गए एक आधुनिक इंटरनेट प्रोटोकॉल कैमरे के जरिए रेलवे ट्रैक और सड़क मार्ग की संदिग्ध निगरानी की जा रही थी। इस सोलर संचालित कैमरे की खोज के बाद हुई शुरुआती जांच में इसके तार अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क और पड़ोसी देश पाकिस्तान से जुड़े होने के संकेत मिले हैं, जिससे सुरक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है।

सिग्नल टावर पर संदिग्ध कैमरे की स्थापना

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब स्वयं को एक सामाजिक संस्था का कार्यकर्ता बताने वाला एक अज्ञात युवक रेलवे फाटक पर पहुँचा और उसने सिग्नल टावर पर चुपके से एक कैमरा स्थापित कर दिया। उस युवक की भाषा और व्यवहार संदिग्ध प्रतीत होने पर वहां तैनात कर्मचारी ने तुरंत स्टेशन मास्टर को इसकी जानकारी दी, जिन्होंने मामले की गंभीरता को समझते हुए आरपीएफ और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। जाँच के दौरान जब कैमरे के तकनीकी पहलुओं को खंगाला गया, तो उसमें कुख्यात आतंकी की तस्वीर और कुछ बेहद आपत्तिजनक डेटा प्राप्त हुआ, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और अधिक बढ़ा दी है।

अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़े तार

जांच एजेंसियों ने जब इस आधुनिक कैमरे के आईपी एड्रेस और डेटा की तकनीकी पड़ताल की, तो इसके तार कर्नाटक के तटीय इलाकों के माध्यम से पाकिस्तान स्थित संदिग्ध समूहों से जुड़े होने की बात सामने आई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एटीएस और एसटीएफ की विशेष टीमों ने घटनास्थल का मुआयना किया है और रेल प्रशासन के उच्चाधिकारियों को भी संपूर्ण विवरण सौंप दिया गया है। प्राथमिक सूचना के आधार पर यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इस तकनीक का उपयोग किसी बड़ी आतंकी साजिश या विशिष्ट आवाजाही की गुप्त रेकी करने के उद्देश्य से किया जा रहा था।

उन्नत तकनीक और सुदूर नियंत्रण का उपयोग

यह कैमरा तकनीकी रूप से इतना सक्षम था कि इसमें लगे 4G सिम और मोबाइल इंटरनेट की मदद से इसे सैकड़ों किलोमीटर दूर बैठा व्यक्ति आसानी से संचालित कर सकता था। रात के घने अंधेरे में भी स्पष्ट दृश्य रिकॉर्ड करने की क्षमता रखने वाला यह उपकरण न केवल स्थिर था बल्कि इसे दूर से ही घुमाया भी जा सकता था ताकि चारों ओर की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके। पुलिस ने इस उपकरण से करीब एक घंटे की रिकॉर्डिंग बरामद की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसके जरिए रेल पटरियों और राजमार्गों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही थी।

विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों द्वारा सघन जांच

वर्तमान में इस पूरे मामले की कमान कई विशेष सुरक्षा दल संभाल रहे हैं जो अलग-अलग बिंदुओं पर गहनता से छानबीन कर रहे हैं ताकि इस साजिश की तह तक पहुँचा जा सके। स्थानीय पुलिस के साथ-साथ रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञ भी इस कार्य में जुटे हैं और आसपास के क्षेत्रों में लगे अन्य कैमरों की फुटेज के माध्यम से उस संदिग्ध युवक की तलाश की जा रही है जिसने इस उपकरण को स्थापित किया था। अधिकारियों का मानना है कि यह किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है और इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाकर किसी अप्रिय घटना को अंजाम देना था।