पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम, सेंट्रल रिज बना आरक्षित वन
नई दिल्ली: राजधानी के पर्यावरण को सुरक्षित करने और प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए सेंट्रल रिज के विशाल भू-भाग को आरक्षित वन का दर्जा प्रदान कर दिया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में लिए गए इस फैसले के अंतर्गत सरदार पटेल मार्ग और राष्ट्रपति भवन एस्टेट के समीप स्थित लगभग 673.32 हेक्टेयर क्षेत्र को भारतीय वन अधिनियम की विशेष धाराओं के तहत कानूनी संरक्षण दिया गया है। इस कदम से न केवल शहर की जैव विविधता को मजबूती मिलेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और हरित पर्यावरण सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक मील का पत्थर साबित होगा।
राजधानी के फेफड़ों को मिला कानूनी सुरक्षा कवच
सेंट्रल रिज को दिल्ली का 'ग्रीन लंग्स' माना जाता है क्योंकि यह प्राचीन अरावली पर्वतमाला का हिस्सा होने के साथ-साथ शहर की वायु गुणवत्ता को सुधारने और भूजल स्तर को बनाए रखने में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य करता है। दशकों से लंबित इस मुद्दे को अब अंतिम रूप दे दिया गया है जिससे इस संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्र को अतिक्रमण और अवैध निर्माण जैसी गतिविधियों से स्थाई सुरक्षा मिल सकेगी। सरकार का मानना है कि इस वन क्षेत्र के वैज्ञानिक प्रबंधन और संरक्षण से शहरी प्रदूषण के प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी और दिल्ली के पारिस्थितिक तंत्र में सकारात्मक बदलाव आएगा।
स्वदेशी वृक्षारोपण से समृद्ध होगी प्राकृतिक संपदा
रिज क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित करने के साथ ही सरकार ने वहां व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण की योजना भी तैयार की है जिसके तहत केवल देसी और पर्यावरण के अनुकूल पौधों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस विशेष अभियान में नीम, पीपल, शीशम, जामुन और आम जैसे छायादार एवं फलदार वृक्षों को लगाया जाएगा ताकि स्थानीय पारिस्थितिकी को प्राकृतिक रूप से विकसित किया जा सके। खाली पड़ी जमीनों को चिन्हित कर वहां बड़े पैमाने पर वनीकरण किया जाएगा जिससे हरित क्षेत्र का विस्तार होने के साथ-साथ वन्यजीवों के लिए भी एक बेहतर आवास तैयार हो सकेगा।
दशकों पुराने लंबित वन संरक्षण कार्यों का समापन
दिल्ली के रिज क्षेत्रों को आरक्षित करने की प्रक्रिया वर्ष 1994 से ही निरंतर चल रही थी लेकिन कानूनी पेचीदगियों के कारण इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था। वर्तमान सरकार ने इच्छाशक्ति दिखाते हुए इस प्रक्रिया को गति प्रदान की है जिसके परिणामस्वरूप दक्षिणी रिज के बाद अब सेंट्रल रिज को भी पूर्णतः सुरक्षित वन का दर्जा मिल गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अन्य शेष रिज क्षेत्रों को भी जल्द ही इसी श्रेणी में लाने की कार्यवाही तेज कर दी गई है ताकि संपूर्ण रिज बेल्ट को एक अभेद्य हरित दीवार के रूप में विकसित किया जा सके।
प्रदूषण मुक्त भविष्य के लिए दीर्घकालिक रणनीतिक योजना
तेजी से बढ़ते शहरीकरण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच दिल्ली सरकार का यह निर्णय शहर के भविष्य को ध्यान में रखकर लिया गया एक रणनीतिक फैसला है। अब तक कुल 4754 हेक्टेयर से अधिक रिज क्षेत्र को आरक्षित वन घोषित किया जा चुका है जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस पहल से वन विभाग को अवैध गतिविधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के अधिकार मिलेंगे और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि दिल्ली की प्राकृतिक संपदा के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो।