संपादकीय इंटरव्यू स्टोरी

महिलाएं अब लाभार्थी नहीं, विकास की भागीदार : नारायण सिंह कुशवाहा

मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री Narayan Singh Kushwah ने कहा है कि सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय और किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार ठोस कदम उठा रही है।शुभ अस्तित्व की संपादक से विशेष बातचीत में मंत्री ने कहा कि “नारी शक्ति” सरकार के लिए केवल एक नारा नहीं, बल्कि नीति का केंद्र है। उन्होंने बताया कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों ग्रामीण महिलाओं को बैंक ऋण, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ा गया है, जिससे वे आज छोटे उद्यमी के रूप में उभर रही हैं।उन्होंने कहा कि कृषि, डेयरी, हस्तशिल्प और सूक्ष्म उद्योगों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। “लखपति दीदी” जैसी योजनाओं से महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही महिला सुरक्षा के लिए हेल्पलाइन, फास्ट ट्रैक कोर्ट और पुलिस में महिला डेस्क जैसी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है।मंत्री ने कहा कि बेटियों की शिक्षा और मातृ स्वास्थ्य के लिए विशेष योजनाएं लागू की गई हैं, जिससे महिलाओं का दीर्घकालिक सशक्तिकरण सुनिश्चित हो रहा है।

वंचित वर्गों के लिए मानवीय पहल

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग को लेकर मंत्री ने कहा कि सरकार सड़कों पर रहने वाले जरूरतमंद, दिव्यांग बच्चों और बुजुर्गों के लिए मानवीय और स्थायी समाधान पर काम कर रही है।उन्होंने बताया कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रैन बसेरा और सामुदायिक रसोई की व्यवस्था बढ़ाई गई है, जहां जरूरतमंदों को सुरक्षित आश्रय और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।भिक्षावृत्ति से जुड़े लोगों के पुनर्वास के लिए पहचान, काउंसलिंग और कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं ताकि उन्हें मुख्यधारा से जोड़ा जा सके। दिव्यांगजन और बुजुर्गों के लिए पेंशन, स्वास्थ्य सेवाएं और सहायक उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उद्यानिकी से बढ़ेगी किसानों की आय

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग को लेकर मंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए फल, सब्जी, फूल और मसालों की खेती को बढ़ावा दे रही है।उन्होंने बताया कि ड्रिप इरिगेशन, पॉलीहाउस और उन्नत बीज जैसी तकनीकों को सब्सिडी के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। किसानों को सीधे मंडियों, प्रोसेसिंग यूनिट और निर्यात बाजार से जोड़ा जा रहा है ताकि उन्हें बेहतर दाम मिल सके।
मंत्री ने कहा कि उद्यानिकी क्षेत्र में प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और परिवहन के जरिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य किसानों को केवल “उत्पादक” नहीं, बल्कि “एग्री-उद्यमी” बनाना है। आने वाले समय में वैल्यू एडिशन, निर्यात क्षमता और क्लस्टर मॉडल आधारित खेती पर विशेष फोकस