मुंगेर। कहते हैं कि 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय' और मुंगेर के एक परिवार के लिए यह कहावत हकीकत साबित हुई है। बासुदेवपुर थाना क्षेत्र के चंडी स्थान निषाद टोला से करीब दो साल पहले लापता हुआ 27 वर्षीय धर्मेंद्र कुमार अब मिल गया है। हैरत की बात यह है कि घर से भटकते हुए वह बिहार से हजारों किलोमीटर दूर जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान सीमा (बॉर्डर) तक जा पहुँचा था।

सरहद पर सेना ने पकड़ा, फिर हुई पहचान

घटना की जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास सेना के जवानों ने एक युवक को संदिग्ध हालत में घूमते देखा। पूछताछ के दौरान जवानों को आभास हुआ कि युवक की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। सुरक्षा कारणों से उसे स्थानीय पुलिस को सौंप दिया गया। इसके बाद जम्मू पुलिस ने पहचान सुनिश्चित करने के लिए देशभर की पुलिस से संपर्क किया, जिसमें कड़ी से कड़ी जुड़ती गई और अंततः युवक की पहचान मुंगेर निवासी धर्मेंद्र सहनी के रूप में हुई।


जब घर पहुँची पुलिस, तो छलके खुशी के आँसू

गुरुवार की सुबह जब बासुदेवपुर थाना पुलिस धर्मेंद्र के घर पहुँची, तो पहले तो परिजन डर गए। लेकिन जैसे ही पुलिस ने जम्मू से भेजी गई तस्वीर दिखाई, माँ मुन्नी देवी की आँखों से आँसू छलक पड़े। उन्होंने तुरंत अपने लाडले को पहचान लिया। पुलिस ने बताया कि धर्मेंद्र फिलहाल जम्मू-कश्मीर के लालपुरा पुलिस स्टेशन (कोहवारा) की निगरानी में पूरी तरह सुरक्षित है।


50 रुपये लेकर निकला था, पूरे इलाके में हुई थी तलाश

परिजनों ने बताया कि 19 अगस्त 2024 को धर्मेंद्र घर से महज 50 रुपये लेकर निकला था। उसे खोजने के लिए गरीब परिवार ने जमालपुर, हवेली खड़गपुर और तारापुर तक ऑटो से माइकिंग करवाई और काफी पैसे खर्च किए, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। वक्त बीतने के साथ परिवार ने उम्मीद छोड़ दी थी, पर अब उसके मिलने की खबर ने खुशियाँ लौटा दी हैं।


गरीब माँ-बाप ने सरकार से माँगी मदद

धर्मेंद्र के पिता शत्रुघ्न सहनी पेशे से मछुआरे और मजदूर हैं। बेटे के मिलने की खुशी तो है, लेकिन आर्थिक तंगी अब पहाड़ बनकर सामने खड़ी है। परिवार के पास इतने पैसे नहीं हैं कि वे जम्मू जाकर उसे वापस ला सकें। माँ मुन्नी देवी ने जिला प्रशासन और बिहार सरकार से गुहार लगाई है कि उनके बेटे को सुरक्षित वापस लाने में मदद की जाए।

सेना के अधिकारी का बयान: कैंप के पास भटकते हुए मिले इस युवक के बारे में आर्मी अधिकारी ने बताया कि वह बहुत कम बोलता है और मानसिक रूप से अस्वस्थ लग रहा था, जिसके चलते उसे स्थानीय प्रशासन को सौंपा गया ताकि वह अपने घर पहुँच सके।